दिल को छू जाने वाली कवितायें जो आपकी पसंदीदा बन जाएगी
यहा आप अच्छे कविता, शायरी, और कोट पढ़ सकते ह
आप whatsapp, facebook ya instagram पे शेयर भी कर सकते हैं
।
मैं गलत हूं या वह गलत है,,,
मेरी अच्छाई किसी को दिखाई नहीं देती,लेकिन मेरी बुराई में सब जिज्ञासु हो जाते हैं!
जिस चीज को मैं चाहता हूं वह मेरी होती ही नहीं,जिसे मैं नहीं चाहता वह बिना चाहे मेरी हो जाती है!!
जिसके पास में जाना चाहता हूं वह मेरे से दूर भागता है ,जिससे मैं दूर जाना चाहता हूं वह बिना चाहे मेरे करीब आ जाता है!!
जिसके साथ मैं अपना विचार प्रकट करता हूं उसे वह नजरअंदाज कर देते हैं ,जो मैं बताना नहीं चाहता उसे वह जानने के लिए बेचैन हो जाते हैं!!
जो उनके पास है उसे वह दिखाना नहीं चाहते, और जो नहीं है उसे दिखाने की कोशिश करते हैं!
क्यों रखते हैं वह इतना अहमभाव कोई तो उन्हें बता, दे चंद लम्हों की है यह जिंदगी हंस कर गुजार दे!!
उन को बदलूं या खुद को बदल डालूं, दूसरों को बदलते बदलते कहीं खुद ही ना बदल जाऊं ;!!
main galat hoon ya vah galat hai,,,
कुछ लोग अपनों से भी ज्यादा अपना जाते हैं ,
पहाड़ जैसी मुश्किलों को तिनके की तरह उडा जाते हैं, जिनकी याद बेवजह आ जाती है,
वो दोस्त कहलाते हैं।
जो उदास चेहरे को भी हंसा जाते हैं ,
चंद लम्हों को यादगार बना जाते हैं ,
हालात चाहे कैसे भी हो हंस के साथ निभाते हैं,
जो दिल खोलकर प्यार बरसाते हैं ,
वो दोस्त कहलाते हैं।
जो जिंदगी में मुसाफिर की तरह आते हैं ,
किसी अपने की तरह हाथ थाम लेते हैं,
जो हौसलों की उड़ान बन जाते हैं
वो दोस्त कहलाते हैं।
जिनके बिना सपने भी अधूरे से लगते हैं ,
जो ख्वाब में भी साथ रहते हैं ,
जो हाथों की लकीर बन जाते है,
वो दोस्त कहलाते हैं। ;!!!!
अनजान गलियां थी उलझे आसमान की तरह,
मैं अकेला था मुसाफिर बेनाम की तरह,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में ,
बिन पानी बरसात की तरह,,!
मौसम नया था अनकहे अल्फाज की तरह,
सुहानी सुबह थी अमावस्या के शाम की तरह,,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में,
अनकहे अल्फाज की तरह,,!
कुछ अपना गए कुछ आजमा गए,
बेखबर अंदाज़ की तरह ,,
कुछ दिल में भी बैठ गए गुनगुनाते राग की तरह,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में,
ईद के चांद की तरह,,!
उनकी याद तो आएगी,
किसी हसीन ख्वाब की तरह,,
वो लोग भी मिले थे रास्ते में,
खुदा-ए इंसान की तरह,,!
काफी इतरा रहा था मैं अपने लेखन पर, लेकिन जब शीर्षक 'माँ, का मिला तो अल्फाज़ खत्म हो गए,,
चाहता भी तो क्या लिख लेता उसके बारे में, जिसकी कोई सीमा ही नहीं है,,
उसे कैसे कागज के पन्नों पर उतार दूं ,
जिसका कोई प्रतिबिंब नहीं है,,
उनकी तुलना मैं किस से करूं जो अतुल्य है।
क्या उसकी तुलना सागर से करूं ?लेकिन सागर तो सीमित है,,
या उसे देवी का नाम दूं ? लेकिन उन्हें तो कोई देखा ही नहीं,,
अगर हिमालय से बराबरी करूं तो ? लेकिन मां के ममता की ऊंचाई तो कोई नाप ही नहीं सकता,,!
मां, आपके लिए हर गम से गुजर जाऊं ,जिस दिन आपके बारे में लिखना सीख गया उस दिन शायद मैं सबसे दुर्लभ बन जाऊं😟
Kaphi itra raha tha main apne lekhan par, lekin jab shirshak maan, ka mila to alphaz khatm ho gae,,
यहा आप अच्छे कविता, शायरी, और कोट पढ़ सकते ह
आप whatsapp, facebook ya instagram पे शेयर भी कर सकते हैं
।
मैं गलत हूं या वह गलत है,,,
मेरी अच्छाई किसी को दिखाई नहीं देती,लेकिन मेरी बुराई में सब जिज्ञासु हो जाते हैं!
जिस चीज को मैं चाहता हूं वह मेरी होती ही नहीं,जिसे मैं नहीं चाहता वह बिना चाहे मेरी हो जाती है!!
जिसके पास में जाना चाहता हूं वह मेरे से दूर भागता है ,जिससे मैं दूर जाना चाहता हूं वह बिना चाहे मेरे करीब आ जाता है!!
जिसके साथ मैं अपना विचार प्रकट करता हूं उसे वह नजरअंदाज कर देते हैं ,जो मैं बताना नहीं चाहता उसे वह जानने के लिए बेचैन हो जाते हैं!!
जो उनके पास है उसे वह दिखाना नहीं चाहते, और जो नहीं है उसे दिखाने की कोशिश करते हैं!
क्यों रखते हैं वह इतना अहमभाव कोई तो उन्हें बता, दे चंद लम्हों की है यह जिंदगी हंस कर गुजार दे!!
उन को बदलूं या खुद को बदल डालूं, दूसरों को बदलते बदलते कहीं खुद ही ना बदल जाऊं ;!!
main galat hoon ya vah galat hai,,,
meri achchhai kisee ko dikhai nahin deti,lekin meri burai mein sab jigyaasu ho jaate hain!
jis chij ko main chaahata hun vah mere hoti hi nahin,jise main nahin chaahata vah bina chaahe meri ho jaati hai!!
jisake paas mein jaana chaahata hun vah mere se door bhaagata hai ,jisase main door jaana chaahata hun vah bina chaahe mere karib aa jaata hai!!
jisake saath main apana vichaar prakat karata hoon use vah najarandaaj kar dete hain ,jo main batana nahin chahta use vah jaanane ke lie bechain ho jaate hain!!
jo unake paas hai use vah dikhaana nahin chahate, aur jo nahin hai use dikhane ki koshish karte hain!
kyon rakhate hain vah itana ahambhav koi to unhen bta, de chand lamhon ki hai yah jindagi hans kar gujaar de!!
un ko badlu ya khud ko badal daalun, dusron ko badlte badlte kahin khud heina badal jau
![]() |
| new hindi poem |
कुछ लोग अपनों से भी ज्यादा अपना जाते हैं ,
पहाड़ जैसी मुश्किलों को तिनके की तरह उडा जाते हैं, जिनकी याद बेवजह आ जाती है,
वो दोस्त कहलाते हैं।
जो उदास चेहरे को भी हंसा जाते हैं ,
चंद लम्हों को यादगार बना जाते हैं ,
हालात चाहे कैसे भी हो हंस के साथ निभाते हैं,
जो दिल खोलकर प्यार बरसाते हैं ,
वो दोस्त कहलाते हैं।
जो जिंदगी में मुसाफिर की तरह आते हैं ,
किसी अपने की तरह हाथ थाम लेते हैं,
जो हौसलों की उड़ान बन जाते हैं
वो दोस्त कहलाते हैं।
जिनके बिना सपने भी अधूरे से लगते हैं ,
जो ख्वाब में भी साथ रहते हैं ,
जो हाथों की लकीर बन जाते है,
वो दोस्त कहलाते हैं। ;!!!!
kuchh log apanon se bhee jyaada apana jaate hai
pahaad jaisee mushkilon ko tinake kee tarah uda jaate hain, jinaki yaad bevajah aa jaatee hai,
vo dost kahlate hain.
jo udaas chehare ko bhee hansa jaate hain ,
chand lamhon ko yadgar bana jaate hain ,
haalaat chaahe kaise bhee ho hans ke saath nibhaate hain,
jo dil kholakar pyaar barsate hain ,
vo dost kahlate hain.
jo jindagee mein musaphir kee tarah aate hain ,
kisee apane kee tarah haath thaam lete hain,
jo hauslon kee udaan ban jaate hain
vo dost kahlate hain.
jinake bina sapane bhee adhoore se lagate hain ,
jo khvab mein saath rhte hai
jo haatho ki lakeer ban jate hai,
vo dost kahlate hain
![]() |
| new hindi poem |
अनजान गलियां थी उलझे आसमान की तरह,
मैं अकेला था मुसाफिर बेनाम की तरह,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में ,
बिन पानी बरसात की तरह,,!
मौसम नया था अनकहे अल्फाज की तरह,
सुहानी सुबह थी अमावस्या के शाम की तरह,,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में,
अनकहे अल्फाज की तरह,,!
कुछ अपना गए कुछ आजमा गए,
बेखबर अंदाज़ की तरह ,,
कुछ दिल में भी बैठ गए गुनगुनाते राग की तरह,
बहुत लोग मिले थे रास्ते में,
ईद के चांद की तरह,,!
उनकी याद तो आएगी,
किसी हसीन ख्वाब की तरह,,
वो लोग भी मिले थे रास्ते में,
खुदा-ए इंसान की तरह,,!
Anjan galiyan thi uljhe asman ki tarah,
main akela tha musaphir benam ki tarah,
bahut log mile the raaste mein ,
bin paani barsat ki tarah,,!
mausam naya tha ankahe alphaj ki tarah,
suhani subah thi amavasya ki shaam ki tarah,,
bahut log mile the raaste mein,
ankahe alphaj ki tarah,,!
kuchh apna gae kuchh ajma gae,
bekhabar andaaz ki tarah ,,
kuchh dil mein bhi baith gae gungunate raag ki tarah,
bahut log mile the raaste mein,
Eid ke chaand ki tarah,,!
unaki yaad to aegi
kisi hasin khvab ki tarah,,
vo log bhi mile the raaste mein,
khuda-e insaan ki tarah,
![]() |
| new hindi poem |
काफी इतरा रहा था मैं अपने लेखन पर, लेकिन जब शीर्षक 'माँ, का मिला तो अल्फाज़ खत्म हो गए,,
चाहता भी तो क्या लिख लेता उसके बारे में, जिसकी कोई सीमा ही नहीं है,,
उसे कैसे कागज के पन्नों पर उतार दूं ,
जिसका कोई प्रतिबिंब नहीं है,,
उनकी तुलना मैं किस से करूं जो अतुल्य है।
क्या उसकी तुलना सागर से करूं ?लेकिन सागर तो सीमित है,,
या उसे देवी का नाम दूं ? लेकिन उन्हें तो कोई देखा ही नहीं,,
अगर हिमालय से बराबरी करूं तो ? लेकिन मां के ममता की ऊंचाई तो कोई नाप ही नहीं सकता,,!
मां, आपके लिए हर गम से गुजर जाऊं ,जिस दिन आपके बारे में लिखना सीख गया उस दिन शायद मैं सबसे दुर्लभ बन जाऊं😟
Kaphi itra raha tha main apne lekhan par, lekin jab shirshak maan, ka mila to alphaz khatm ho gae,,
chaahta bhi to kya likh leta uske baare mein, jisaki koi sima hi nahin hai,,
use kaise kagaj ke panno par utar dun jiska koi pratibimb nahin hai,,
unki tulna main kis se karun jo atulya hai.
kya usaki tulana saagar se karun ?lekin saagar to simit hai,,
ya use devi ka naam dun ? lekin unhen to koi dekha hi nahin,,
agar himalay se brabri karu to ? lekin maa ke mamta ki unchai to koi naap hi nahin sakta,,!
man, apke lie har gam se gujar jaun ,jis din aapake baare mein likhana sikh gya us din shayad main sabase durlabh ban jaun
![]() |
| new hindi poem |




































